Saturday, 29 November 2014

अल्लाह ता'आला पर ही कामिल तवक्कल व भरोसा करना चाहिए.

अल्लाह ता'आला क़ुरान में फरमाता है
अगर अल्लाह ता'आला तुम्हारी मदद करे तो तुम पर कोई ग़ालिब नही आ सकता और अगर अल्लाह ता'आला तुम्हे छोड़ दे तो उस के बाद कौन है जो तुम्हारी मदद करे, लिहाज़ा ईमान वालो को अल्लाह ता'आला पर ही भरोसा करना चाहिए.
क़ुरान (सुरा 3/140)

और तुम अल्लाह ता'आला ही पर भरोसा करो अगर तुम ईमान वाले हो.
क़ुरान (सुरा माइदा 5/23)

अल्लाह के रसूल सललाल्लाहू आलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया
अगर तुम अल्लाह ता'आला पर इस तरह तवक्क्ल व भरोसा करो जैसा भरोसा करने का हक़ है तो वो तुम्हे ऐसा रिज़्क (रोज़ी) देगा जैसे परिंदो (बर्ड) को रिज़्क देता है परिंदे सुबहा खाली पेट निकलते है और शाम को पेट भरकर वापस आते है.
हदीस (तिमीज़ी : 2344)

लेकिन आज मुसलमान अल्लाह को छोड़ कर दूसरो पर ऐसा भरोसा करते है जैसा अल्लाह पर करना चाहिए हालाकी वो जानते है उन लोगो को भी अल्लाह ही ने पैदा किया और वफात दी,
जबकि ईमान वालो को सिर्फ़ अल्लाह ही पर भरोसा करना है इसलिए अल्लाह ने क़ुरान में कहा (सुरा झूमर 39/36) क्या अल्लाह अपने बंदे के लिए काफ़ी नही ?

अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये अमीन......

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