Saturday, 29 November 2014

मोज़ीज़ात (चमत्कार) नबी करीम सललाल्लाहू आलेही वासल्लम का बकरी का दूध दुहना.

हज़रत अब्दुल्लाहा बिन मसूद रज़ी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है.
में उकबा की बकरिया चराया करता था एक दिन नबी करीम सललाल्लाहू आलेही वासल्लम और हज़रत अबूबक्र तशरीफ़ लाए,
दोनो ने मुझसे पूछा क्या पीने के लिए कुछ दूध है मेने कहा ये बकरिया अमानत है में आपको दूध नही पीला सकता आप ने फरमाया क्या कोई ऐसी बकरी का बच्ची है जो अभी नर से जूफ़्त ना हुई हो,
में एक बकरी उनके पास ले आया अपने उसके थनो पर हाथ फेरा और अल्लाह से दुआ माँगी थनो में दूध भर आया अपने एक प्याले में दूध दूहा और खूब पिया मेने भी पिया फिर अपने थनो को फरमाया खाली हो जा वो खाली हो गये मेने कहा मुझे भी ये दुआ सीखा दी जिये,
अपने फरमाया तुम अक़्ल्मन्द हो तुम्हे सीखनी चाहिए,
ईमान लाने के बाद मेने आप से 70 सूरते सीखी जिनमे मुझसे कोई बहस नही कर सकता.

हदीस (मुसनद अहमद सिफवतुस्सफवा : 1स 181)

हज़रत हूबेश बिन खालिद रज़ी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है.
नबी करीम सललाल्लाहु आलेही वासल्लम ने जब हिजरत की तो एक खेमे के पास गुज़रे उनसे कुछ खाने के किए माँगा पर ना मिला अपने एक बकरी देखी जो बहुत कमजोर और दूध नही देती थी अपने थनो पर हाथ फेरा और बिस्मिल्लाह पढ़ कर अल्लाह से दुआ फारमाइ बर्तन में दूध दूहा तो बर्तन पूरा भर गया सबने खूब सैर हो कर पिया आप फिर हिज़रत पर रवाना हो गये.
हदीस (मिशकतुल मसाबीह : 3/5943)

अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये
अमीन..

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