Saturday, 29 November 2014

अल्लाह ता'आला ही के लिए तवाफ़ और इतिकाफ.

अल्लाह ता'आला क़ुरान में फरमाता है.
लोगो चाहिए के अल्लाह के कदिम घर (यानी बेतुल्लाह) का तवाफ करे.
क़ुरान (सुरा हज 22/29)

हमें इब्राहिम इस्माईल से वादा लिया के तुम मेरे घर को तवाफ करने वालो और इतिखाफ करने वालो और रुकु सज़्दा करने वालो के लिए पाक साफ रखो.
क़ुरान (सुरा बक़रा 2/120)

हज़रत अबू हरेरा रज़ी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है.
अल्लाह के रसूल सललाल्लाहू आलेही वासल्लम ने इरशाद फरमाया.
कयामत उस वक़्त तक कायम नही होगी जब तक कबीला दोस की औरतो की पीठे जीअल खालसा के गिर्द तवाफ ना करने लगे (यानी कयामत के करीब ये शिर्क दुबारा रुनुमा हो जाएगा) जीअलख़ालसा दोस कबीले का बुत था जिस की अरब लोग जाहिलियत में पूजा किया करते थे.
हदीस (सहीह बुखारी : 7116)

तवाफ ये के सवाब की नियत से किसी मख़सूस जगह पर खास दिन जाकर उसके गिर्द चक्क़र लगाए जाए.
इतिकाफ ये के सवाब की नियत से किसी खास जगह पर खास मुदत के लिए जाया जाए या बैठा जाए.
ये दोनो काम इबादत है इसलिए सिर्फ़ अल्लाह के लिए ही किए जा सकते है चुकी तवाफ हज और उमराह मे शामिल है इसलिए ये सिर्फ़ बेतुल्लाह के गिर्द ही किया जा सकता है इस के अलावा किसी भी जगह का तवाफ गैरूल्लाह की इबादत में शामिल होगा.
इतिकाफ सिर्फ़ हरम और मस्जिद में किया जाएगा इसके अलावा किसी खास जगह खास दिन या दीनो की तादात मे जाकर बैठना गैरूल्लाह (यानी अल्लाह के अलावा दूसरे किसी) की इबादत मे शामिल होगा.
इसलिए दोनो ही इबादत खास सिर्फ़ खालिस अल्लाह ही के लिए की जाए.



अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये
अमीन....

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