Monday, 8 December 2014

Wo Kaun Se Kaam Hai Jinko Karne Se Allah Mujhe Na Pasand Karta Hai ?

{HAMARE SAWALAT} ? {QURAN KE JAWABAAT} !

SAWAL : wo kaun se kaam hai jinko karne se Allah mujhe napasand karta hai ?

JAWAB : “beshaq ALLAH zyadati aur zulm karne walo ko pasand nahi karta .”
(Quran : Sura Baqra 2/190)

“ALLAH bigad failane Walo ko pasand nahi karta.”
(Quran : Sura Mayeda 5/64)

“Beshaq Allah kisi dhokhebaaz, nashukre ko pasand nahi karta.
(Quran : Sura Haj 22/38)

“Beshaq wo inkar karne walo ko pasand nahi karta”
(Quran : Sura Rum 30/45)

“Tum us cheez ka afsos na karo jo tumse jaati rahe aur na us par itrao jo usne tumhein ataa kar di. Allah itrane wale , badai jataane wale ko pasand nahi karta.”
(Quran : Sura Hadid 57/23)

“Apne Rabb ko gidgidakar aur chupke chupke pukaro. Beshaq wo had se aage badhne walo ko pasand nahi karta.
(Quran : Sura Araf 7/55)

“Rahe wo log jo imaan laaye aur unhone achche kaam kiye unhein wo unka poora poora badla dega. ALLAH zaalimo ko pasand nahi karta.
(Quran : Imran 3/57)

“ALLAH byaz ko ghatata aur mitata hai aur sadqo (charities) ko badhata hai. Aur Allah kisi na shukre , haq maarne wale ko pasand nahi karta.”
(Quran : Sura Baqra 2/276)

“Beshaq Allah achchi tarah jaanta hai jo kuch wo chupate hai aur jo kuch zahir karte hain . usey aise log pasand nahi, jo apne aapko badaa samajhte ho.”
(Quran : Sura Nahal 16/23)

ALLAH HAME HAQ BAAT SAMJHNE KI TOFFIK ATA FARMAYE AMIN.....

वो कौन से काम है जिनको करने से अल्लाह मुझे नापसंद करता है ?

{हमारे सवालात} ? {क़ुरान के जवाबात} !

सवाल : वो कौन से काम है जिनको करने से अल्लाह मुझे नापसंद करता है ?
जवाब : “बेशक अल्लाह ज़्यादती और ज़ुल्म करने वालो को पसंद नही करता .”
(क़ुरान : सुरा बक़रा 2/190)

“अल्लाह बिगाड़ फैलने वालो को पसंद नही करता.”
(क़ुरान : सुरा मायेदा 5/64)

“बेशक अल्लाह किसी धोखेबाज़, ना शुक्रे को पसंद नही करता.
(क़ुरान : सुरा हज 22/38)

“बेशक वो इनकार करने वालो को पसंद नही करता”
(क़ुरान : सुरा रूम 30/45)

“तुम उस चीज़ का अफ़सोस ना करो जो तुमसे जाती रहे और ना उस पर इतराव जो उसने तुम्हें अता कर दी. अल्लाह इतरने वाले , बड़ाई जताने वाले को पसंद नही करता.”
(क़ुरान : सुरा हदीद 57/23)

“अपने रब को गिड़गिडकर और चुपके चुपके पुकारो. बेशक वो हद से आगे बढ़ने वालो को पसंद नही करता.
(क़ुरान : सुरा अराफ़ 7/55)

“रहे वो लोग जो ईमान लाए और उन्होने अच्छे काम किए उन्हें वो उनका पूरा पूरा बदला देगा. अल्लाह ज़ालिमो को पसंद नही करता.
(क़ुरान : इमरान 3/57)

“अल्लाह ब्याज़ को घटता और मिटाता है और सद्क़ो (चॅरिटीस) को बढ़ता है. और अल्लाह किसी ना शुक्रे , हक़ मारने वाले को पसंद नही करता.”
(क़ुरान : सुरा बक़रा 2/276)

“बेशक अल्लाह अच्छी तरह जानता है जो कुछ वो छुपाते है और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं . उसे ऐसे लोग पसंद नही, जो अपने आपको बड़ा समझते हो.”
(क़ुरान : सुरा नहल 16/23)

अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये अमीन

Mujh Par Koi Musibat Aaye To Mein Kya Karu ?

HAMARE SAWALAT AUR QURAN MAZID KE JAWABAT

1. SAWAL : Mujh par koi musibat aaye to mein kya karu

“Namaz ka ehtemam kar aur bhalaai ka hukm de aur burai se rok aur jo musibat bhi tujh par padey uspar sabr se kaam le.,
beshaq ye un kaamo me se hai jo himmat aur mazboot iraado ke kaam hain.”

(Quran : Sura Lukman 31/17)

2. SAWAL : Mujhe musibat me kya dua maangni chahiye ?

“Humarey Rabb ! agar hum bhoolein ya chook jaayein to humein na pakadna. Humarey Rabb ! aur hum par aisa bojh na daal jaisa toone. Humse pehle ke logo par daalaa tha. Humarey Rabb !
Aur humse wo bojh na uthwa jiski humko taakat nahi. Aur humko maaf kar aur humko apni panaah me rakh, aur hum par Reham kar. Tu hi humara maalik hai,
tu kaafiro par humko madad de.

(Quran : Sura Baqra 2/286)

3. SAWAL : Mein musibat me Khuda se kis cheez ke saath madad maangu ?

“Ay Imaan waalo ! sabr aur namaaz se madad chaho. Beshaq Allah sabr karne walo ke saath hai.
(Quran : Sura Baqra 2/153)

“Sabr aur namaz se madad chaho aur beshaq namaz zaroor bhari hai magar un par nahi jo Dil se meri (ALLAH ki) taraf jhukte hain.
(Quran : Sura Baqra 2:45)

ALLAH HAME HAQ BAAT SAMJHNE KI TOFFIK ATA FARMAYE AMIN......

मुझ पर कोई मुसीबत आए तो में क्या करू ?

हमारे सवालात और क़ुरान मज़ीद के जवाबत 

“नमाज़ का एहतेमाम् कर और भलाई का हुक्म दे और बुराई से रोक और जो मुसीबत भी तुझ पर पड़े उसपर सब्र से काम ले., बेशक ये उन कामो मे से है जो हिम्मत और मज़बूत इरादो के काम हैं.”
(क़ुरान : सुरा लुक़मान 31/17)

2. सवाल : मुझे मुसीबत मे क्या दुआ माँगनी चाहिए ?

“हमारे रब ! अगर हम भूलें या चूक जायें तो हमें ना पकड़ना. हमारे रब ! और हम पर ऐसा बोझ ना डाल जैसा तूने. हमसे पहले के लोगो पर डाला था. हमारे रब !
और हमसे वो बोझ ना उठवा जिसकी हमको ताक़त नही. और हमको माफ़ कर और हमको अपनी पनाह मे रख, और हम पर रहम कर. तू ही हमारा मालिक है,
तू काफिरो पर हमको मदद दे.

(क़ुरान : सुरा बक़रा 2/286)

3. सवाल : में मुसीबत मे खुदा से किस चीज़ के साथ मदद मांगू ?

“ए ईमान वालो ! सब्र और नमाज़ से मदद चाहो. बेशक अल्लाह सब्र करने वालो के साथ है.
(क़ुरान : सुरा बक़रा 2/153)

“सब्र और नमाज़ से मदद चाहो और बेशक नमाज़ ज़रूर भारी है मगर उन पर नही जो दिल से मेरी (अल्लाह की) तरफ झुकते हैं.
(क़ुरान : सुरा बक़रा 2:45)

अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये अमीन

Mujh Par Musibat Kyo Aati Hai ?

HAMARE SAWALAT AUR QURAN KE JAWABAT

“Jo musibat tumhein pahuchi wo to tumhare apne hatho ki kamaai se pahuchi aur bahut kuch to wo (Allah) maaf kar deta hai.
(Quran : Sura Shura 42/30)

“Jo musibat bhi jamin me aati hai aur tumhare apne upar, wo ek khas kitab me likhi hai. Is’se pahle ki hum usey wajood me laayein- beshk ye Allah ke liye aasan hai. – (ye baat tumhein isliye bataa di gai) taaki tum us cheez ka afsos na karo jo tumse jaati rahe aur na us par ful jaao jo usne tumhein ataa ki ho. Allah kisi itraane wale , badaai jataane wale ko pasand nahi karta.”
(Quran : Sura Hadid 57/22-23)

“Keh do- hamem kuch bhi pesh nahi aa sakta siway uske jo Allah ne likh diya hai. Wo hi hamara malik hai. Aur imaan walo ko Allah hi par bharosa karna chahiye.
(Quran : Sura Taubah 9/51)


ALLAH HAME HAQ BAAT SAMJHNE KI TOFFIK ATA FARMAYE AMIN......

मुझ पर मुसीबत क्यो आती है ?

हमारे सवालात और क़ुरान के  जवाबात

“जो मुसीबत तुम्हें पहुची वो तो तुम्हारे अपने हाथो की कमाई से पहुची और बहुत कुछ तो वो (अल्लाह) माफ़ कर देता है.
(क़ुरान : सुरा शूरा 42/30)

“जो मुसीबत भी ज़मीन मे आती है और तुम्हारे अपने उपर, वो एक खास किताब मे लिखी है. इस’से पहले की हम उसे वजूद मे लायें- बेशक ये अल्लाह के लिए आसान है. – (ये बात तुम्हें इसलिए बता दी गई) ताकि तुम उस चीज़ का अफ़सोस ना करो जो तुमसे जाती रहे और ना उस पर फूल जाओ जो उसने तुम्हें आता की हो. अल्लाह किसी इतराने वाले , बड़ाई जताने वाले को पसंद नही करता.”
(क़ुरान : सुरा हदीद 57/22-23)

“कह दो- हमे कुछ भी पेश नही आ सकता सिवाय उसके जो अल्लाह ने लिख दिया है. वो ही हमारा मालिक है. और ईमान वालो को अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए.
(क़ुरान : सुरा तौबा 9/51)

अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये अमीन