Wednesday, 25 March 2015

क्या हमें अपने आपको सिर्फ़ मुसलमान कहना चाहिए.

क्या हमें अपने आपको सिर्फ़ मुसलमान कहना चाहिए.

"ए ईमान वालो अल्लाह से डरो जैसा की उससे डरने का हक़ है, और मरते दम तक मुस्लमान ही रहना."
क़ुरान (सुराह  आले इमरान 3/102)

आज मुसलमान फिरको और जमातों में बट गये और अपनी-अपनी जमातों के नामो से पहचाने जाते है
जबकी हमें अपने आप को (मुस्लमान) कहना चाहिए क़ुरान मे अल्लाह ने कहा अपने आप को (मुस्लमान) कहो
हम आपस के इक्तिलाफ को ख़त्म करे जैसा की अल्लाह ने कहा.


"आओ उस बात की तरफ जो हममें तुममें एक़्सा है, हम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत ना करे उसके साथ किसी को शरीक ना करे पस अगर वो मुँह फेर ले तो कह्दो के तुम गवाह रहो हम तो (मुस्लमान) है"
क़ुरान (सुराह  इमरान 3/64)

और अच्छी बात बताने वाला बुरे कामों से रोकने वाला वो कौन है जैसा की अल्लाह ने कहा अपनी किताब मे.

"और उससे ज़्यादा अच्छी बात वाला कौन है जो अल्लाह की तरफ बुलाए और नेक काम करे और कहे के में यक़ीनन (मुस्लमानो) में से हूँ "
क़ुरान (सुराह  फुसिलत 41/33)

इसलिए हमें अपने आपको (मुस्लमान) कहना चाहिए (मुस्लमान) का माना है (फरमाबरदार) किसका अल्लाह और उसके रसूल सल्ल. का
हमें वो बात माननी चाहिए जो अल्लाह ने क़ुरान मे हुक़म दिया और हमारे प्यारे नबी सल्ल. ने हदीस मे इरशाद फरमाया तब ही हम कामयाब (मुस्लमान) बन सकते है.

अल्लाह से हम दुआ करे जैसा की अल्लाह ने हमें सिखाया.

ए अल्लाह मेरे इल्म मैं इज़ाफा अता फरमा. وقُلْ ربِّ زِدْنِي عِلْما
क़ुरान (सुराह  ता.हा.20/114)

अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये आमीन...
आगे पहुचाए अपने कानटेक्ट और ग्रुप पर इंशा अल्लाह

KYA HAMEN APNE APKO SIRF MUSLMAN KAHNA CHAHIYE.

KYA HAMEN APNE APKO SIRF MUSLMAN KAHNA CHAHIYE.


"A Iman walo allah se daro jesa ki usse darne ka haq hai, Aur marte dam tak MUSLMAN hi rahna."
Quran (Surah ale imran 3/102)

Aaj muslman firko aur jamaton me bat gaye aur apni-apni jamaton ke naamo se pahchane jate hai, jabki hamen apne aap ko (MUSLMAN) kahna Chahiye Quran me Allaah ne kaha apne aap ko (MUSLMAN) kaho,
Hum apas ke iktilaaf ko khatm kare jaisa ki Allah ne kaha

.
"Aao us bat ki taraf jo hammen tummen eksa hai, ham Allah ke siwa kisi ki Ibadat na kare Uske sath kisi ko sharik na kare pas agar wo munh pher le to kahdo ke tum gawah raho ham to (MUSLMAN) hai"
Quran (Surah Imran 3/64)

Aur Achchi bat batane wala bure kamon se rokane wala wo koun hai jaisa ki Allah ne kaha apni kitab me.

"Aur Usse jyada achchi bat wala koun hai jo Allah ki taraf bulaye aur nek kam kare aur kahe ke men yakinan (MUSLMANO) men se hun"
Quran (Surah Fusilat 41/33)

Isliye hamen apne apko (MUSLMAN) kahna chahiye (MUSLAMN) ka mana he (FARMABARDAR) kiska Allah aur uske RASOOL SAW. ka,
hamen wo baat manni chahiye jo Allah ne quran me Huqm diya aur hamare pyare nabi saw. ne hadees me irshad farmayq tab hi hum kamyab (MUSLMAN) ban sakte hai.

Allah se hum DUA kare jaisa ki ALLAH ne hamen sikhaya.

وقُلْ ربِّ زِدْنِي عِلْماً  A Allah mere ilm men ijafa ata farma

Quran (Surah ta.ha.20/114)

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क्या में वो कह सकता हूँ जो में ना करू ?

क्या में वो कह सकता हूँ जो में ना करू ?

“ए ईमान वालो ! तुम वो बात क्यो कहते हो जो करते नही ?
अल्लाह के यहाँ बहुत ना पसंद बात है की तुम वो बात कहो जो करते नही.”

क़ुरान (सुराह सफ़फ़ : 61/2-3)

“क्या तुम लोगो को तो नेकी और भलाई का पैगाम देते हो और खुद को भूल जाते हो, हालाकी तुम किताब भी पढ़ते हो ? फिर क्या तुम अक्‍ल (दिमाग़/माइंड) से काम नही लेते ?”
(क़ुरान : सुरा बक़रा 2/44)

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Kya Mein Wo Kah Sakta Hoon Jo Mein Na Karu ?

Kya Mein Wo Kah Sakta Hoon Jo Mein Na Karu ?

“Ay Imaan walo ! tum wo baat kyo kehte ho jo karte nahi ?
Allah ke yaha bahut na pasand baat hai ki tum wo baat kaho jo karte nahi.”

Quran (Surah Saff :  61/2-3)

“Kya tum logo ko to neki aur bhalai ka paigam dete ho aur khud ko bhool jaate ho, halaki tum kitab bhi padhte ho ? Fir kya tum akl(Dimag/mind) se kaam nahi lete ?”
Quran (Surah Baqra : 2/44)

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Mujhe Logo Se Kaisa Salook Rakhna Chahiye. ?

Mujhe logo se kaisa salook rakhna chahiye. ?

"Aur jo shakhs sabar karle aur maaf ker de yaqeenan yeh badi himmat kay kamon mein say (aik kaam) hai.
Quran  ( Surah Shura : 42/43)

“Aap dar guzar ko ikhtiyar kare nek kaam ki taleem den aur jahilon say aik kinara hojayen.
Quran ( Surah Aaraf : 7/199)

“Neki aur bdi barabar nahi hoti. Buraee say bhalai ko dafa kero phir wohi jiske aur tumharay darmiyan dushmani hai aisa hojayega jaisay dili dost. Aur yeh baat unhin ko naseeb hoti hai jo sabr kare aur ise siwaye bade naseeb walon kay koi nahi paa sakta.
Quran (Surah Fusilat : 41/34-35)

“Hamne to aasamano aur zameeno ko aur jo kuch unke beech hai bamaksad paida kiya hai. Aur wo kiyamat ki ghadi beshk aane wali hai. Isliye tum achche darguzar se kaam lo.”
Quran (Surah Hijr : 15/85)

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में दीन (इस्लाम) में कैसे कामयाबी हासिल कर सकता हूँ. ?

में दीन (इस्लाम) में कैसे कामयाबी हासिल कर सकता हूँ. ?

“और जो कोई अल्लाह और उसके रसूल का हुक्म को माने और अल्लाह से डरे और उसकी बताई हद (लिमिट्स) का ख्याल रखे, तो ऐसे ही लोग कामयाब हैं.”
क़ुरान ( सुराह नूर  24/52)

“कामयाब हो गया वो जिसने अपने आप को निखार लिया, और अपने रब का नाम लिया और नमाज़ अदा की.”
क़ुरान (सुराह आला 87/14-15)

“कामयाब हो गया वो जिसने उसे (यानी अपनी रूह और शख्सियत को) सावरा (डेवेलप) किया, और नाकाम हुआ वो जिसने उसे बिगाड़ दिया.”
क़ुरान ( सुराह शम्स 91/9-10)

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Main Din (Islam) Men Kaise Kamyabi Hasil Kar Sakta Hoon. ?

Mein din (Islam) men kaise kamyabi hasil kar sakta hoon. ?

 “Aur jo koi Allah aur uske Rasool k hukm ko mane aur Allah se darey aur uski batai hadd (Limits) ka khayal rakhe, to aise hi log kaamyab hain.”
Quran (Surah Noor 24:52)

“Kamyab ho gaya wo jisne apne aap ko nikhar liya, aur apne Rab ka naam liya aur namaaz Adaa ki.”
Quran ( Surah Aala 87:14-15)
“Kamyab ho gaya wo jisne use (yaani apni rooh aur shakhsiyat ko) sawara (Develop) kiya, aur naakam hua wo jisne usey bigad diya.”
Quran ( Surah Shams 91:9-10)

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क्या अल्लाह मेरा इम्तिहान लेता है ?

क्या अल्लाह मेरा इम्तिहान लेता है ?
“और हम (अल्लाह) बेशक कुछ डर से, और कुछ  भूख से और कुछ जान-माल से और पैदावार की कमी से,
तुम्हारा इम्तिहान लेंगे. और सब्र से काम लेने वालो को खुशख़बरी सुना दो.”

(क़ुरान : सुरा बक़रा 2/155)

"ज़मीन को हमने खुशनुमा बनाया ताकि अजमाले (इम्तिहान) कौन नेक आमाल करके आता है.
(क़ुरान : सुरा कहफ़ 18/7)

"हर जानदार मौत का मज़ा चखने वाला है हम बटोरे इम्तिहान तुम मे से हर एक को बुराई और बलैई मे डालते है, और तुम सब हमारी ही तरफ लोटने वेल है. (ताकि देखे कों सब्र और शुक्र करने वाला है)
(क़ुरान : सुरा अंबिया 21/35)

“जिसने तय किया मौत और ज़िंदगी को ताकि तुम्हारा इम्तिहान ले के तुम’मे आमाल के नज़र मे कौन सबसे अच्छा है, वो बड़ी हिकमत वाला और बड़ा माफ़ करने वाला है.”
(क़ुरान : सुरा मुल्क 67/2)

अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये अमीन
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Kya Allah Mera Imtihaan Leta Hai ?

Kya Allah Mera Imtihaan Leta Hai ?

“Aur hum (ALLAH) Beshaq kuch dar se, aur kuch  bhookh se aur kuch jaan-maal se aur paidawar ki kami se, tumhara imtihaan lenge. Aur sabr se kaam lene walo ko khushkhabri suna do.”
(Quran : Sura Baqra 2/155)

"Jamin ko hamne khushnuma banaya taki ajmale (Imtihan) koun nek aamal karke ata hai.
(Quran : Sura Kahaf 18/7)

"Har jandar mout ka maza chakhne wala hai ham batore imtihan tum me se har ek ko burai aur bhlai me dalte hai, aur tum sab hamari hi taraf lotne wale hai. (taki dekhe kon sabr aur shukr karne wala hai)
(Quran : Sura Ambiya 21/35)

“Jisne tay kiya maut aur zindagi ko taaki tumhara imtihaan le k tum’me aamal ke nazar me kaun sabse achcha hai, wo badi hikmat wala aur bada maaf karne wala hai.”
(Quran : Sura Mulk 67/2)

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Tuesday, 10 March 2015

आसान नमाज़ अरबी हिंदी लिपि (दो रकात नौ मुस्लिम के लिये )

आसान  नमाज़ (दो रकात ) अरबी हिंदी लिपि 

अल्लाहु अकबर ( कहकर  दोनों हाथ बांध ले  )

(ये पढ़े ) सुब्हा न कल्लाहुमा वबिहम्दिका व् तबरकसमुका व् तआला जददूका वला इलाह गैरुका० 
अउजबिल्लाह मिनश शैतान निराजीम० 
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निरराहिंम०

अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन ० 
अर्रहमान निर्रहीम ० 
मलिकी यौमिद्दीन ० 
इय्या क नअ बुदु व् इय्या क नस्तईन ० 
इहदिनससिरातल मुस्तकीम ० 
सिरातल्लजी न अन्अम त अलैहिम ०  
गैरिल मग्जूबि अलैहिम व् लज्जालीन ० (((आमीन )))

 अल्लाहु अकबर (कहकर रूकूअ में यानि झुककर दोनों हाथ घुटनो पर रखे )
(ये पढ़े ) सुब्हा न रब्बियल अज़ीम ० (३ बार )

 रूकूअ से खड़े होने की दुआ (सीधे खड़े हो कर )
(ये पढ़े ) समिअल्लाहु लिमन हमिदह ० 


अल्लाहु अकबर (कहकर सज्दे में यानि हाथ, सिर, नाक जमीन पर टिका दे )
(ये पढ़े ) सुब्हा न रब्बियल अअला ० (३ बार )

अल्लाहु अकबर (कहकर दोनों पैरो पर कुलहो के बल बैठ जाये )
(ये पढ़े ) रब्बिग्फिर्ली, रब्बिग्फिर्ली० 

अल्लाहु अकबर (कहकर सज्दे में यानि हाथ, सिर, नाक जमीन पर टिका दे )
(ये पढ़े ) सुब्हा न रब्बियल अअला ० (३ बार )

दूसरी रकात के लिये
अल्लाहु अकबर (कहकर सीधे खड़े होकर हाथ बांध ले )
(ये पढ़े ) जैसा ऊपर बताया गया (अल्हम्दु) से लेकर (आमीन) तक पढ़े दूसरी रकात पूरी करे

तशहहुद (यानि दोनों पैरो पर कुलहो के बल बैठ कर दोनों हाथ घुठनों के ऊपर रख ले )
 (ये पढ़े ) अत्तहिय्यातु लिल्लाही वस्स ल वातु वत् तय्यबातु अस्सलामु अलै क अय्युहन्नबिय्यु  व रहमतुल्लाहि व ब रकातुहु अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस सालिहीन
अश्हदु अल्ला इला ह इलल्लाहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहू व् रसूलुहू ० 

(फिर ये दुरुद पढ़े ) अल्लाहुम म सल्लि अला मुहम्मदिवं व् अला आलि मुहम्मदिन 
कमा सल्लै त अला इब्राही म व अला आलि इब्राही म इन्न क हमिदुम मज़ीद ० 
अल्लाहुम म बारिक अला मुहम्मदिवं व अला आलि मुहम्मदिन
कमा बारक त अला इब्राही म व अला आलि इब्राही म इन्न क हमिदुम मज़ीद ० 

(फिर ये दुआ पढ़े ) अल्लाहुम्मा रब्बना अतैना फ़िदुनिया हसनतवं  फिल आख़िरत हसनतवं व किन्न अज़ाबन्नार ०

(फिर सलाम फेर दे यानि सीधे कंधे की तरफ चेहरा करे )
 (ये पढ़े ) अस्सलामु  अलैकुम व रहमतुल्लाह
(फिर उल्टे कंधे की तरफ चेहरा करे)
 (ये पढ़े ) अस्सलामु  अलैकुम व रहमतुल्लाह 

 (ये पढ़े )  अल्लाहु अकबर (१ बार  जोर से कहे )
 (ये पढ़े ) अस्तग्फिरुल्लाह  (३ बार )

आप की  नमाज मुक्कमल हुई (इंशा अल्लाह )
((( जज़ाक अल्लाह )))