Sunday, 3 May 2015

मुझे अपने बुज़ुर्गो (पूर्वज/फोरफादर्स) की इत’आत (पैरवी/अनुसरण/followship) कब नही करना चाहिए ?

मुझे अपने बुज़ुर्गो (पूर्वज/फोरफादर्स) की इत’आत (पैरवी/अनुसरण/followship) कब नही करना चाहिए ?

“और जब उनसे कहा जाता है की, अल्लाह ने जो कुछ उतारा है उसकी इत’आत करो, तो कहते हैं
नही, बल्कि हम तो उसकी इत’आत करेंगे जिस पर हमने अपने बाप-दादा को पाया. क्या उस हाल मे भी जबकि उनके बाप-दादा कुछ अक्ल/दिमाग़ से काम ना लेते रहे हो और ना सीधे राह पर रहे हो ?”

क़ुरान( सुरा बक़रा 2/170)

“और जब उनसे कहा जाता है की उस चीज़ की और आओ जो अल्लाह ने नाज़ील की है, और रसूल की और, तो वो कहते हैं
हमारे लिए तो वो ही काफ़ी है जिस पर हमने अपने बाप-दादा को पाया है. क्या अगर उनके बाप-दादा कुछ भी ना जानते हो और ना सीधे राह पर हो ?”

क़ुरान (सुरा मुहम्मद 47/21)

अल्लाह हमें हक़ बात समझने की और सही अमल करने की तोफीक अता फरमाये आमीन......

Mujhe apne buzurgo (Purvaj/forefathers) ki ita’at (Pairvi/Anusaran/followship) kab nahi karna chahiye ?

Mujhe apne buzurgo (Purvaj/forefathers) ki ita’at (Pairvi/Anusaran/followship) kab nahi karna chahiye ?
 

 “Aur jab unse kaha jata hai ki, ALLAH ne jo kuch utara hai uski ita’at karo, to kehte hain
Nahi, balki ham to uski ita’at karenge jis par hamne apne baap-dada ko paya. Kya us haal me bhi jabki unke baap-dada kuch akl/dimag se kaam na lete rahe ho aur na seedhey raah par rahe ho ?”

Quran(Sura Baqra 2/170)

“aur jab unse kaha jata hai ki us cheez ki aur aao jo ALLAH ne naazil ki hai, aur Rasool ki aur, to wo kehte hain
Hamare liye to wo hi kaafi hai jis par hamne apne baap-dada ko paya hai. Kya agar unke baap-dada kuch bhi na jaante ho aur na seedhey raah par ho ?”

Quran (Sura Muhmmad 47/21)

ALLAH HAME HAQ BAAT SAMJHNE KI AUR SAHI AMAL KARNE KI TOFFIK ATA FARMAYE AAMIN......

मुझे दुनिया और आख़िरत मे अच्छी ज़िंदगी कैसे मिल सकती है ?

मुझे दुनिया और आख़िरत मे अच्छी ज़िंदगी कैसे मिल सकती है ?

“जो नेक अमल (अच्छा काम) करे मर्द हो या औरत लेकिन बाईमान (मुसलमान) हो तो ज़रूर हम उसे अच्छी ज़िंदगी अता फरमाएगे.
और उनके नेक अमाल (अच्छे कामो) बदला (अज्र/जज़ा/सवाब) ज़रूर-ज़रूर देंगे.
(जो उनके सब से बेहतर काम क लायक हो)”

क़ुरान ( सुरा नहल 16/97)

अल्लाह हमें हक़ बात समझने की और सही अमल करने की तोफीक अता फरमाये आमीन......

Mujhe duniya aur aakhirat me achchi zindagi kaise mil sakti hai ?

Mujhe duniya aur aakhirat me achchi zindagi kaise mil sakti hai ?

“Jo Nek Amal (Achcha Kaam) kare mard ho ya aurat Lakin baimaan (Musalaman) ho to zaroor ham usey achchi zindagi ataa farmayege.
Aur unke nek amaal (Achche kamo) Badlaa (Ajar/Jazaa/Sawab) jarur-jarur denge.
(jo unke sab se behtar kaam k laayak ho)”

Quran ( Nahal 16/97)

ALLAH HAME HAQ BAAT SAMJHNE KI AUR SAHI AMAL KARNE KI TOFFIK ATA FARMAYE AAMIN......

अल्लाह मुझसे कैसा सलूक चाहता है. ?

अल्लाह मुझसे कैसा सलूक चाहता है. ?

“और याद करो जब बनी इसराइल से हमने वादा लिया –
अल्लाह के अलावा किसी की बंदगी (इबादत, दुआ,) ना करोगे.
और मा-बाप के साथ और रिश्तेदारो के साथ और यतीमो और मुहताज़ो के साथ अच्छा सलूक करोगे और ये की लोगो से अच्छी बात कहो और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात (अल्लाह की राह में खर्च करो) दो.”

क़ुरान ( बक़रा 2/83)

अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये आमीन

ALLAH mujhse kaisa salook chahta hai. ?

ALLAH mujhse kaisa salook chahta hai. ?

“Aur yaad karo jab bani Israil se humne wada liya –
ALLAH ke alawa kisi ki bandagi (Ibadat, Dua,) na karoge.
Aur maa-baap ke sath aur rishtedaro ke sath aur yateemo aur muhtaajo ke sath achcha salook karoge aur ye ki logo se achchi baat kaho aur namaaz qaayam karo aur zakaat (ALLAH ki rah men khrch karo) do.”

Quran ( Baqra 2/83)

ALLAH HAME HAQ BAAT SAMJHNE KI TOFFIK ATA FARMAYE AAMIN......

वो कौन से काम हैं जिनको करने से मुझे जन्नत मिल सकती है ?

वो कौन से काम हैं जिनको करने से मुझे जन्नत मिल सकती है ?

“और अपने रब की तौबा और उस जन्नत की और बढ़ो. जिसका फैलाव आसमानो और ज़मीनो जैसा है.
वो उन लोगो क लिए तैयार है जो डर रखते हैं. वो लोग जो खुशहाली और तंगी के हर हाल मे खर्च करते हैं और गुस्से को रोकते हैं और लोगो को माफ़ करते हैं.,
और अल्लाह को ऐसे लोग अज़ीज़ हैं. जो अच्छे से अच्छा काम करते हैं.
और जिनका हाल ये है की जब वो कोई खुला गुनाह कर बैठते हैं या अपने आप पर ज़ुल्म करते हैं तो फ़ौरन अल्लाह उन्हें याद आ जाता है और वो अपने गुनाहो की माफी चाहने लगते हैं
और अल्लाह के अलावा कौन है, जो गुनाहो को बख़्श दे ?
और जानते बुझते वो अपने किए पर अड़े नही रहते. उनका बदला उनके रब की और से बख़्शिस है और ऐसे बाग़ (Garden) हैं जिनके नीचे नहरे (Canals) बहती होंगी.
उनमे वो हमेशा रहेंगे. और क्या ही अच्छा बदला है अच्छे आमाल करने वालो का.”

क़ुरान ( इमरान 3/133-136)

अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये आमीन

Wo kaun se kaam hain jinko karne se mujhe Jannat mil sakti hai ?


Wo kaun se kaam hain jinko karne se mujhe Jannat mil sakti hai ?


“Aur apne Rab ki tauba aur us jannat ki aur badho. Jiska failav aasmaano aur zameeno jaisa hai.
wo un logo k liye taiyaar hai jo darr rakhte hain. Wo log jo khushhali aur tangi ke har haal me kharch karte hain aur gusse ko rokte hain aur logo ko maaf karte hain.,
aur ALLAH ko aise log azeez hain. Jo achche se achha kaam karte hain.
Aur jinka haal ye hai ki jab wo koi khula gunah kar baithte hain ya apne aap par zulm karte hain to fauran ALLAH unhein yaad aa jata hai aur wo apne gunaho ki maafi chahne lagte hain
aur ALLAH ke alawa kaun hai, jo Gunaho ko bakhsh de ?
Aur jaante bujhte wo apne kiye par adey nahi rehte. Unka badla unke Rabb ki aur se bakhshis hai aur aise baag (Garden) hain jinke neeche nehre (Canals) behti hongi.
Unme wo hamesha rahenge. Aur kya hi achcha badla hai achche aamal karne walo ka.”

Quran ( Imran 3/133-136)

ALLAH HAME HAQ BAAT SAMJHNE KI TOFFIK ATA FARMAYE AAMIN......

क्या अल्लाह के क़ुरान को समझना हमारे लिए मुश्किल है.

क्या अल्लाह के क़ुरान को समझना हमारे लिए मुश्किल है.

और बेशक हमने क़ुरान को समझने के लिए आसान कर दिया,
तो क्या कोई नसीहत हासिल करने वाला है.

क़ुरान (सुरा क़मर 54/17-22-32-40)

अल्लाह त'आला अपनी आयतों को खोल-खोल कर बयान करता है ताकि तुम हिदायत पा सको.
क़ुरान (सुरा अन'नाम 6/55) और (इमरान 3/103)

क्या तुम क़ुरान को नही समझते तुम्हारे दिलों पर ताले लग गये है.
क़ुरान (मुहम्मद 47/24)

अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये आमीन

KYA ALLAH KE QURAN KO SAMJHNA HAMARE LIYE MUSHKIL HAI.

KYA ALLAH KE QURAN KO SAMJHNA HAMARE LIYE MUSHKIL HAI.

Aur Beshk hamne quran ko samjhne ke liye aasan kar diya,
To kya koi nasihat hasil karne wala hai.

Quran (Sura Qamar 54/17-22-32-40)

Allah Ta'ala apni aayato ko khol-khol kar bayaan karta hai taki tum hidayat pa sako.
Quran (Sura An'nam 6/55) Aur (Imran 3/103)


Kya tum quran ko nahi samjhte tumhare dilo par taale lag gaye hai.
Quran (Muhmmad 47/24)

ALLAH HAME HAQ BAAT SAMJHNE KI TOFFIK ATA FARMAYE AAMIN......

अल्लाह और रसूल से मुहब्बत का तक़ाज़ा क्या है ?

अल्लाह और रसूल से मुहब्बत का तक़ाज़ा क्या है ?

ए नबी कह दीजिए अगर तुम अल्लाह से मुहब्बत रखते हो तो मेरी ताबेदारी (ईतात,फरमाबारदारी,हूक्म,सुन्नत पर अमल) करो,
अल्लाह खुद तुम से मुहब्बत करेगा तुम्हारे गुनाह माफ़ कर देगा वो बड़ा माफ़ करने वाला है.

क़ुरान (सुरा इमरान 3/31)

मुहब्बत का तक़ाज़ा तो ये है के नबी की सुन्नतो (तरीक़ो) पर चला जाए (जुलूस, झंडे, गाने बजाने, शोर-शराबे, बैंड-बाजे) ये मुहब्बत का तक़ाज़ा नही,
आप से मुहब्बत की अलामत ये है आप को जिन कामो से मुहब्बत थी उन कामो (यानी तौहीद, नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज) को किया जाए तब आपका हक़ अदा होगा.

नबी करीम सल्ल. के हक़.
01. आप पर ईमान (जैसा हक़ है) लाना.
02. आप की ईतात (हुक़म मानना) करना.
03. आप से और शरीयत से मुहब्बत करना.
04. आप के दिन की मदद करना.
05. आप की दिन और इज़्ज़त की हिफ़ाज़त करना.
06. आप पर दुरुद भेजना.
07. आप के दुश्मन से दुश्मनी और दोस्तो से दोस्ती करना.
08. आप को जिससे से मुहब्बत है उससे से मुहब्बत करना.
09. आप के साथ इंसाफ़ करना धोका ना करना.
10. आप के हुक़्म से आगे ना बड़ा जाए.


अल्लाह ने फरमाया.
ए लोगो जो ईमान लाए हो अल्लाह और उसके रसूल से आगे ना बडो और अल्लाह से डरते रहो यक़ीनन अल्लाह सुनने वाला जानने वाला है.
क़ुरान (सुरा हुज़ूरत 49/1)

अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये आमीन...

ALLAH AUR RASOOL SE MUHBBAT KA TAKAZA KYA HAI ?

ALLAH AUR RASOOL SE MUHBBAT KA TAKAZA KYA HAI ?

A Nabi kah dijiye agar tum ALLAH se muhbbat rakhte ho to meri tabedari (Itaat,Farmabardari,Huqm,Sunnat Par Amal) karo,
ALLAH khud tum se muhbbat karega tumhare gunah maaf kar dega wo bada maaf karne wala hai.

Quran (Sura Imran 3/31)

Muhbbat ka takaza to ye hai ke NABI ki sunnato (Tariko) par chala jaye (julus, jhande, gane bajane, shor-sharabe, baind-baaje) ye muhbbat ka takaza nahi,
Aap se Muhbbat ki alamat ye hai app ko jin kamo se muhbbat thi un kamo (Yani Tauhhed, Namaz, Roja, Jakat, Haj) ko kiya jaye tab apka haq ada hoga.

NABI KARIM SAW. KE HAQ
01. Aap par Imaan (Jaisa Haq Hai)lana.
02. Aap ki Itaat (Huqm Manna) Karna.
03. Aap se aur shariyat se muhbbat karna.
04. Aap ke din ki madad karna.
05. Aap ki din aur ijjat ki hifajat karna.
06. Aap par durud bhejna.
07. Aap ke dushman se dushmani aur dosto se dosti karna.
08. Aap ko jisse se muhbbat hai usse se muhbbat karna.
09. Aap ke sath insaaf karna dhoka na karna.
10. Aap ke huqm se aage na bada jay.


ALLAh ne farmaya.
A Logo jo imaan laye ho ALLAH aur uske RASOOL se aage na bado aur ALLAH se darte raho Yakinan ALLAH sunne wala janane wala hai.
Quran (Sura Huzurat 49/1)

ALLAH HAME HAQ BAAT SAMJHNE KI TOFFIK ATA FARMAYE AAMIN......

मुझे किसका हुक्म मान’ना चाहिए ?

मुझे किसका हुक्म मान’ना चाहिए ?

“अल्लाह का डर रखो और आपस मे सुलह और सफाई रखो,
और अल्लाह और उसके रसूल (अलेहिसलाम) का हुक्म को मानो अगर तुम ईमान वाले हो.!”

(क़ुरान : सुरा अनफाल 8/1)

“ए ईमान वालो ! हुक्म मानो अल्लाह का और हुक्म मानो रसूल का और उनका जो  तुम मे हुकूमत वाले हैं फिर अगर तुम मे किसी बात पर झगड़ा (इकतिलाफ) उठे तो उसे तुम अल्लाह और रसूल की और लौटाओ,
अगर तुम अल्लाह और क़यामत पर ईमान रखते हो.
ये बेहतर है और उसका अंजाम सबसे अच्छा है.”

(क़ुरान : सुरा निसा 4/59)
अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये आमीन...

Mujhe kiska Hukm man’na chahiye ?

Mujhe kiska Hukm man’na chahiye ?

“Allah ka dar rakho aur aapas me Sulah aur safaai rakho,
Aur Allah aur Uske Rasool (Alayhissalam) ka hukm ko maano agar tum Imaan wale ho.!”

(Quran : Sura Anfal 8/1)

“Ay Imaan walo ! Hukm maano ALLAH ka aur Hukm maano Rasool ka aur unka jo  tum me hukoomat wale hain fir agar tum me kisi baat par jhagda (Ikhtilaf) uthey to usey tum ALLAH aur Rasool ki aur lautaao,
Agar tum Allah aur Qayaamat par imaan rakhte ho.
Ye behtar hai aur uska anjaam sabse achcha hai.”

(Quran : Sura Nisaa 4/59)

ALLAH HAME HAQ BAAT SAMJHNE KI TOFFIK ATA FARMAYE AAMIN......

मेरी बातचीत कैसी होनी चाहिए ?

मेरी बातचीत कैसी होनी चाहिए ?

“मेरे बन्दो से कह दो की बात वही कहें जो अच्छी हो.
शैतान तो उनके बीच उकसाकर(फुसलाकर) फ़साद डालता रहता है. बेशक शैतान तो इंसान का खुला दुश्मन है.”
(क़ुरान : सुरा इसरा 17/53)

“तबाही है उसके लिए जो लोगो  के ऐब निकाले और पीठ पीछे बुराई करे.”
(क़ुरान : सुरा हुमज 104/1)

और अपनी आवाज़ कुछ पस्त/धीमी कर, बेशक सब आवाज़ो मे बुरी आवाज़ गधे की है.”
(क़ुरान : सुरा लुक़मान 31/19)

“ए ईमान लाने वालो ! अल्लाह का डर रखो और सीधी बात कहो, अल्लाह तुम्हारे आमाल तुम्हारे लिए संवार देगा और तुम्हारे गुनाह बख़्श देगा.”
(क़ुरान : सुरा आहज़ब 33/70-71)

“रहमान के वो बंदे जो ज़मीन पर आहिस्ता चलते हैं और जब जाहिल उनसे बात करते हैं तो कहते हैं बस सलाम!”
(क़ुरान सुरा फुरकान 25/63)
अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये आमीन...

Meri baatchit kaisi honi chahiye ?

Meri baatchit kaisi honi chahiye ?

“Mere bando se keh do ki baat wahi kahein jo achchi ho. Shaitan to unke beech uksakar (fuslakar) fasaad daalta rehta hai. Beshaq shaitan to insaan ka khula dushman hai.”
(Quran : Sura Isra 17/53)

“Tabahi hai uske liye jo logo  ke aib nikaale aur peeth peeche burai karey.”
(Quran : Sura Humaz 104/1)

Aur apni aawaz kuch past/dheemi kar, beshaq sab aawazo me buri aawaz gadhe ki hai.”
(Quran : Sura Lukman 31/19)

“A Imaan lane walo ! Allah ka dar rakho aur seedhi baat kaho, Allah tumhare aamal tumhare liye sanwaar dega (Decorate) aur tumhare gunah bakhsh dega.”
(Quran : Sura Ahzab 33/70-71)

“Rehman ke wo bandey jo zameen par aahista chaltey hain aur jab jaahil unse baat karte hain to kehte hain bas salaam!”
(Quran : Sura Furkan 25/63)





ALLAH HAME HAQ BAAT SAMJHNE KI TOFFIK ATA FARMAYE AAMIN......