Sunday, 3 May 2015

अल्लाह और रसूल से मुहब्बत का तक़ाज़ा क्या है ?

अल्लाह और रसूल से मुहब्बत का तक़ाज़ा क्या है ?

ए नबी कह दीजिए अगर तुम अल्लाह से मुहब्बत रखते हो तो मेरी ताबेदारी (ईतात,फरमाबारदारी,हूक्म,सुन्नत पर अमल) करो,
अल्लाह खुद तुम से मुहब्बत करेगा तुम्हारे गुनाह माफ़ कर देगा वो बड़ा माफ़ करने वाला है.

क़ुरान (सुरा इमरान 3/31)

मुहब्बत का तक़ाज़ा तो ये है के नबी की सुन्नतो (तरीक़ो) पर चला जाए (जुलूस, झंडे, गाने बजाने, शोर-शराबे, बैंड-बाजे) ये मुहब्बत का तक़ाज़ा नही,
आप से मुहब्बत की अलामत ये है आप को जिन कामो से मुहब्बत थी उन कामो (यानी तौहीद, नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज) को किया जाए तब आपका हक़ अदा होगा.

नबी करीम सल्ल. के हक़.
01. आप पर ईमान (जैसा हक़ है) लाना.
02. आप की ईतात (हुक़म मानना) करना.
03. आप से और शरीयत से मुहब्बत करना.
04. आप के दिन की मदद करना.
05. आप की दिन और इज़्ज़त की हिफ़ाज़त करना.
06. आप पर दुरुद भेजना.
07. आप के दुश्मन से दुश्मनी और दोस्तो से दोस्ती करना.
08. आप को जिससे से मुहब्बत है उससे से मुहब्बत करना.
09. आप के साथ इंसाफ़ करना धोका ना करना.
10. आप के हुक़्म से आगे ना बड़ा जाए.


अल्लाह ने फरमाया.
ए लोगो जो ईमान लाए हो अल्लाह और उसके रसूल से आगे ना बडो और अल्लाह से डरते रहो यक़ीनन अल्लाह सुनने वाला जानने वाला है.
क़ुरान (सुरा हुज़ूरत 49/1)

अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये आमीन...

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