Thursday, 18 August 2016

ASHARA JILHIJJA (PAHLE 10 DIN)


अशरा जिलहिज़्जा (पहले 10 दिन)


IRSHADE BAARI TA'ALA HAI
Aur log malum ke dino men Allah ke naam ka jikr kare
Quran (Sura Haj 22/28)

FARMANE NABVI HAI.

Koi din aise nahi hai jin men amal karna ALLAH ke nazdik in 10 dino se jyada afjal aur mehbob ho,
isliye in men kasrat se jayda se jyada yah jikr kiya karo
(La Ilaha Illallah, Allahu Akbar, Alhamdulillah)

Hadees (Musnad Ahmad 2/75)

Ashra jilhijja (Yani 1 se 10 tak ke din ) Hazrat Umar aur hazrat abu huraira razi. Bazar ki taraf niklte aur takbirat kahte
(La Ilaha Illallah, Allahu Akbar, Alhamdulillah) aur log bhi unke sath takbirat kahte.

Hadees (Sahih Bukhari : 969)

(Ye sunnat aaj takriban mit gai hai, Is sunnat ko jinda karna chahiye)

IRSHADE BAARI TA'ALA HAI

Aur ginti ke kuch dino men ALLAH ko yad karo.
Quran (Sura Baqra 2/203)

9 Jilhijja ko namaze fazr se lekar 13 jilhijja ki namaze asr tak unchi awaz se takbire kahna chahiye 
(Book : Nilul Avtar 2/521)

Allahu Akbar Allahu Akbar Allahu Akbar Kabira
(Book : Nilul Avtar 2/621)

Allahu akbar allahu akbar la ilaha illallah wallahu akbar allahu akbar wa lillahil hamd
(Book : Nilul Avtar 2/621)

इरशादे बारी त'आला है
और लोग मालूम के दिनो में अल्लाह के नाम का ज़िक्र करे
क़ुरान (सुराह हज 22/28)

फरमाने नब्वी है.
कोई दिन ऐसे नही है जिन में अमल करना अल्लाह के नज़दीक इन 10 दिनो से ज़्यादा अफ़ज़ल और मेहबूब हो,
इसलिए इन में कसरत से ज़्यादा से ज़्यादा यह ज़िक्र किया करो
(ला इलाह इल्ल्लाआह, अल्लाहू अकबर, अल्हाम्दुलिल्लाह)
हदीस (मुसनद अहमद 2/75)

अशरा जिलहिज़्जा (यानी 1 से 10 तक के दिन ) हज़रत उमर और हज़रत अबू हुरैरा रज़ी. बाज़ार की तरफ निकलते और तकबीरात कहते
(ला इलाह इल्ल्लाआह, अल्लाहू अकबर, 
अल्हाम्दुलिल्लाह) और लोग भी उनके साथ तकबीरात कहते.

हदीस (सही'ह बुखारी : 969)

(ये सुन्नत आज तकरीबन मिट गई है, इस सुन्नत को जिंदा करना चाहिए)

इरशादे बारी त'आला है
और गिनती के कुछ दिनो में अल्लाह को याद करो
क़ुरान (सुराह बक़रा 2/203)

9 जिलहिज़्जा को नमाज़े फजर से लेकर 13 जिलहिज़्जा की नमाज़े अस्र तक उँची आवाज़ से तकबीरे कहना चाहिए
(बुक : निलूल अवतार 2/521)

अल्लाहू अकबर अल्लाहू अकबर अल्लाहू अकबर कबीरा
(बुक : निलूल अवतार 2/621)

अल्लाहू अकबर अल्लाहू अकबर ला इलहा इल्लाल्लाह वल्लाहू अकबर अल्लाहू अकबर वा लिल्लहिल हम्द
(बुक : निलूल अवतार 2/621)


ALLAH HAME HAQ BAAT SAMJHNE KI AUR SAHI AMAL KARNE KI TOFFIK ATA FARMAYE AAMIN......

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