Sunday, 3 May 2015

मेरी बातचीत कैसी होनी चाहिए ?

मेरी बातचीत कैसी होनी चाहिए ?

“मेरे बन्दो से कह दो की बात वही कहें जो अच्छी हो.
शैतान तो उनके बीच उकसाकर(फुसलाकर) फ़साद डालता रहता है. बेशक शैतान तो इंसान का खुला दुश्मन है.”
(क़ुरान : सुरा इसरा 17/53)

“तबाही है उसके लिए जो लोगो  के ऐब निकाले और पीठ पीछे बुराई करे.”
(क़ुरान : सुरा हुमज 104/1)

और अपनी आवाज़ कुछ पस्त/धीमी कर, बेशक सब आवाज़ो मे बुरी आवाज़ गधे की है.”
(क़ुरान : सुरा लुक़मान 31/19)

“ए ईमान लाने वालो ! अल्लाह का डर रखो और सीधी बात कहो, अल्लाह तुम्हारे आमाल तुम्हारे लिए संवार देगा और तुम्हारे गुनाह बख़्श देगा.”
(क़ुरान : सुरा आहज़ब 33/70-71)

“रहमान के वो बंदे जो ज़मीन पर आहिस्ता चलते हैं और जब जाहिल उनसे बात करते हैं तो कहते हैं बस सलाम!”
(क़ुरान सुरा फुरकान 25/63)
अल्लाह हमे हक़ बात समझने की तोफीक अता फरमाये आमीन...

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